जनवरी १६, २०१९
केरलके पथानामथिट्टामें स्थित प्रसिद्ध सबरीमला मंदिरमें बुधवार, १६ जनवरी लगभग ३० वर्षकी आयुकी दो महिलाओंने प्रवेश करनेका प्रयास किया । यद्यपि, विरोधका सामना करनेके पश्चात वे मंदिर जानेके राहको आधा ही पूर्ण कर सकीं और वापस आना पडा ।
कन्नूरकी रहनेवाली दोनों महिलाओंके नाम रेशमा निशांत और शनिला सजेश है । दोनोंने मंदिर जानेवाले राहमें ५.५ किलोमीटरकी दूरी निर्धारित कर ली थी । इसी मध्य क्रोधित भक्तोंने उन्हें आगे जानेसे रोक दिया । दोनों महिलाओंने मंदिर जानेके लिए चढाई प्रातःकाल पांच बजे खरम्भ की थी और दोनोंने पुरुषोंके वस्त्र पहने हुए थे ।
दोनों महिलाओंका कहना है कि पुलिसने उन्हें सुरक्षा देनेका आश्वासन दिया था, जिसके पश्चात वे मंदिरमें दर्शन करनेके लिए गई थीं । पुलिसने दोनों महिलाओंका विरोध कर रहे पांच प्रदर्शनकारियोंको बन्दी बनाया, जिसके पश्चात महिलाओंने कुछ समयके लिए चढाई जारी रखी ।
दोनों महिलाओंके कुछ आगे बढनेके पश्चात दोनोंको एक बार पुनः विरोध प्रदर्शनका सामना करना पडा । यह घटना दो घंटेतक चलती रही । तनावपूर्ण स्थितिको देखते हुए पुलिस दोनों महिलाओंको बेस शिविर ले गई ।
इससे पूर्व प्रधानमन्त्रीने सबरीमाला मंदिरमें महिलाओंके प्रवेशको लेकर राज्यमें मचे कोहरामपर मंगलवारको केरलके वामपंथी शासन और विपक्ष कांग्रेसको आडे हाथों लिया । उन्होंनें कहा कि इतिहासमें इसे सबसे लज्जित करनेवाले व्यवहारोंमेंसे एक कहा जाएगा ।
हम जानते हैं कि कम्युनिस्ट देशके इतिहास, संस्कृति और धार्मिकताका आदर नहीं करते हैं; परन्तु कोई ऐसी कल्पना नहीं कर रहा था कि वे इस प्रकारसे घृणा करेंगें ।
“केरलकी पुलिस निधर्मी मुख्यमन्त्रीके निर्देशनमें मन्दिर दर्शनको आनेवाली तथाकथित समाजसेविकाओंको संरक्षण प्रदानकर अधर्म कर रहे हैं और हिन्दू अपने स्थानपर डटे हैं । स्वतन्त्रताके पश्चात यह प्रथम प्रकरण होगा, जब हिन्दू जागृत होकर एकत्र हुए हैं व निधर्मियोंके विरुद्ध एकत्र होकर खडे है । हिन्दुओंके इस जागरणसे आनेवाले धर्मराज्यकी सुगन्ध आ रही है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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