सितम्बर २८, २०१८
महिला और बाल विकास मन्त्री मेनका गांधीने सबरीमाला देवालयको न्यायालयके निर्णयको ऐतिहासिक बताया है ! उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है हिन्दू धर्म सबको जोड कर रखता है; लेकिन ठेकेदारोंने इसे लेकर कितने प्रतिबन्ध लगा रखे हैं ! सभी नियम गढ दिए कि यहां कौन जाएगा और कौन नहीं जाएगा ! देवालयमें जाति, धर्म और स्त्रीके प्रवेश प्रतिबन्ध एक प्रकारसे धार्मिक ठेकेदारी है । भगवान सबके लिए होता है । जब हिन्दू धर्ममें महिलाको जब शक्ति माना जाता है तो कौन मना कर सकता है कि शक्ति ही देवालयमें न जाए ! भगवान किसके लिए है ?
यह धर्म है जो बताता है कि देवालयमें आप प्रसन्नता पूर्वक जाए । यह कोई ‘जिमखाना क्लब’ नहीं है कि जो सूट नहीं पहनता है, वह क्लब नहीं जाएगा ! जिस वर्गकी आय कम है, वह क्लब नहीं जाएगा ! यह धर्म है और इसका अर्थ ‘क्लब’ नहीं होता है । इस निर्णयने सबरीमालाको ‘क्लब’से देवालय बना दिया है ।
“मन्त्री जी ! क्या आपको अब यह बताना पडेगा कि अज्ञानतावश आप न केवल अनुचित कार्यका साथ दे रही है, वरन जो भाषाका प्रयोग आप हिन्दुओंके आस्था केन्द्रके लिए कर रही है, वह सर्वथा अनुचित है ! आजके तथाकथित बुद्धिवादी जीवोंकी स्थिति देख हंसी आती है कि ये समाजको चलानेका दावा करने वाले स्वयं भी चलने योग्य नहीं हैं ! जिसे धर्मका ‘अ’ ऐसा अक्षर तक ज्ञात नहीं, वह भी पूरी वर्णमाला सिखाना चाहता है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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