मन्दिरके शासकीय नियन्त्रणके दुष्परिणाम, निधर्मी मार्क्सवादी अब सबरीमालाके विद्वान तन्त्रीसे मांगेंगें शुद्धिकरणपर स्पष्टीकरण !!


जनवरी ४, २०१८

सबरीमाला मंदिरके संरक्षक ‘त्रावणकोर देवासम बोर्ड’ने शुक्रवार, ४ जनवरीको ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’पर स्पष्टीकरण मांगनेका निर्णय किया । ‘टीडीबी’के एक पदाधिकारीने बताया कि समितिने तन्त्रीसे इस बातका स्पष्टीकरण मांगा है कि उन्होंने बुधवारको ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ क्यों किया ? ‘टीडीबी’की बैठकके पश्चात मीडियासे वार्तामें समितिके अध्यक्ष ए. पद्मकुमारने इसकी जानकारी दी । पद्मकुमारने कहा, “शुद्धिकरण अनुष्ठान न्यायालयके निर्देशके विरुद्ध है, इसलिए हमने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है । उनका स्पष्टीकरण आनेपर आगेकी कार्यवाही की जाएगी ।” तन्त्रीको १५ दिनोंका समय दिया गया है । ‘मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी’के पूर्व विधायक पद्मकुमारको मुख्यमंत्री पिनरईने ‘टीडीबी’का अध्यक्ष नियुक्त किया है । शुद्धिकरण अनुष्ठानके लिए बुधवारको दिनके १०.३० बजे मंदिरको एक घंटाके लिए बंद रखा गया था ।


केरलके मुख्यमन्त्रीने पी विजयनने बुधवारको प्रातःकाल ३.३० बजे बिंदु और कंका दुर्गाद्वारा दर्शन किए जानेकी पुष्टि की थी ।

 

“हिन्दुओंकी सहिष्णुताने उन्हें अब उस मोडपर ला खडा किया है कि एक निधर्मी मुख्यमन्त्री पवित्र देवालयके संरक्षणके लिए एक निधर्मी मार्कसवादी पुत्रका चयन करता है और वह निधर्मी उस देवालयके विद्वान पण्डितोंको सिखाता है कि देवालयको कैसे चलाना है ?  इससे अधिक अपमानजनक और हास्यस्पद क्या होगा ? यह मन्दिरोंके शासकीय नियन्त्रणका ही दुष्परिणाम है । उससे बडी विडम्बना यह हो गई कि एक ओर हिन्दू धर्मपर प्रहार हो रहा है, दूसरी ओर कुछ एक धर्मज्ञ वीरोंको छोड शेष मौन रहकर गंगा स्नानकर अपनेको महापुण्यशाली घोषित कर रहे हैं !! अतः अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही धर्म संरक्षण कर सकती है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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