अक्तूबर १७, २०१८
उच्चतम न्यायालयने जिसप्रकार केरलके सबरीमाला देवालयके भीतर प्रत्येक आयुकी महिलाओंके प्रवेशकी आज्ञा दी है और इस सन्दर्भमें लोगोंके विरोधको लेकर भाजपाके वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामीने कहा कि न्यायालयने अपना निर्णय ले लिया है और लोग इसे परम्पराका नाम दे रहे हैं । इसीप्रकार से तीन तलाक भी एक परम्परा थी, जिसे न्यायालयने अनुचित बताया था । उस समय न्यायालयके निर्णयका इन्ही लोगोंने स्वागत किया था और न्यायालयकी प्रशंसा की थी; लेकिन अब वही हिन्दू सबरीमाला निर्णयके विरुद्घ सडकपर हैं । स्वामीने कहा कि यह युद्ध हिन्दू पुनर्जागरण और रूढिवादके विरुद्घ है । हिन्दू धर्ममें प्रत्येक जन समान है, ऐसेमें लोगोंका यह विरोध पूर्ण रूपसे अनुचित है ।
शास्त्रों को संशोधित किया जा सकता है
स्वामीने कहा कि पुनर्जागरण कहता है कि सभी हिन्दू समान हैं और जाति व्यवस्थाका अन्त होना चाहिए, क्योंकि आज हर ब्राह्मण विद्वान नहीं है, ये लोग आज सिनेमामें हैं, व्यापारमें भी हैं । यह कहां लिखा है कि जातिका निर्धारण जन्मसे होता है । शास्त्रोंको भी संशोधित किया जा सकता है !
“परम्परागत गुरुसे शिक्षा-दीक्षा व उपदेश द्वारा शास्त्रके गूढ विषयोंका ज्ञान प्राप्त किया जाता है, कोरी बुद्धिसे इस गूढ रहस्योंको समझना व्यर्थ है; अतः जिन विषयोंपर व्यक्तिको ज्ञान न हो, वहां मौन ही सर्वोच्च माना जाता है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : वन इण्डिया
Leave a Reply