कुछ लोग पूछते हैं कि सज्जन और दुर्जनकी क्या परिभाषा क्या है ? उनके उत्तरके अनेक शास्त्र वचनोंमें यह शास्त्र वचन उनके उत्तरका कुछ अंश अवश्य इंगित करता है ।
विद्या विवादाय धनम् मदाय, शक्तिः परेशाम् परपीडनाय ।
खलस्य साधोर्विपरीतमेतद ज्ञानाय, दानायचरक्षणाय ॥
अर्थ : विद्या विवादके लिए, धन मदके लिये, शक्ति दूसरोंको सतानेके लिए, ये तथ्य सज्जनमें, दुष्टोंसे विपरीत, क्रमशः ज्ञान, दान और रक्षाके लिए होते हैं ।
आजके बुद्धिभ्रष्ट लोग बिना साधना किए या शास्त्रोंका अभ्यास किए, वाद-विवाद करते हैं, उनके लिए इस निधर्मी शिक्षण पद्धति अनुसार, मात्र रटकर कुछ पदवी ले लेना ही विद्वता होती है और कुछ लोग तो अंग्रेजों जैसे ‘सूट-बूट’ पहनकर उनके जैसे उच्चारणकी नकल कर, अंग्रेजी भाषामें राष्ट्रद्रोही और धर्मद्रोही वक्तव्य देनेको करनेको विद्वता कहते हैं !, किन्तु ऐसे लोग दुर्जन कहलानेके अधिकारी होते हैं ! वैसे ही, धन और पद मिलनेपर कुछ लोग अहंकारमें चूर होकर अन्य लोगोंको सताते हैं, उन्हें यह ज्ञात नहीं होता कि पद और धन, पूर्व जन्मोंके पुण्यका फल है और अहंकारमें अत्याचार और अधर्म करनेपर इसका भी परिणाम आज नहीं तो कल भुगतना ही होगा ! इसके विपरीत सज्जन व्यक्ति अपने धन, बुद्धि या विद्या एवं पदका उपयोग लोककल्याणके लिए करते हैं । वर्तमान कालमें धर्मकी शिक्षा न मिलनेके कारण पुण्यसे प्राप्त धन, बुद्धि और पदका लोग दुरुपयोग कर अपना सर्वनाश कर रहे हैं !
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