कुछ लोग कह रहे हैं कि हमने पुलवामा आक्रमणका प्रथम प्रतिशोध, इसके मुख्य आरोपीको मारकर ले लिया ! प्रतिशोध भी प्रथम और दूसरा होता है क्या ? पुलवामा आक्रमणका मुख्य आरोपी ‘जैश-ए-मोहम्मद’का कर्ता-धर्ता और प्रमुख मसूद अजहर है, जिसे पाकिस्तानने संरक्षण दे रखा है और इस आक्रमणका एक ही प्रतिशोध हो सकता है, उस दुष्ट मुखियाका वध और उसको संरक्षण देनेवाले देश पाकिस्तानकी राजधानी इस्लामाबादपर भारतीय तिरंगाका लहराना ! हमारे हुतात्मा सैनिकोंकी आत्माको मात्र यही पग शांति प्रदान कर सकता है ! क्योंकि ऐसा करनेपर ही पुनः पुलवामा जैसे आक्रमणकी पुनरावृत्ति कभी नहीं होगी !
समष्टि प्रतिशोध ऐसा होना चाहिए कि दुष्ट उस दुष्कृत्यको पुनः करनेकी स्वप्नमें भी कल्पना न कर सके !
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