आइये सीखें ! संस्कृतनिष्ठ हिन्दी


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हिन्दुओ ! हम आपके समक्ष कुछ दिवसोंसे हिन्दी समाचार पत्रों या जालस्थानोंके सामयिक समाचारके अंशकी कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कर रहे हैं और इस माध्यमसे यह बतानेका प्रयास कर रहे हैं कि आप स्वयं देखें कि इन सभी ‘बुद्धिजीवी पत्रकारों’ने किसप्रकार भारतमें हिन्दी भाषाके ‘विकृतिकरण’का उत्तरदायित्व ले रखा है । आपसे अनुरोध है कि आप संस्कृतनिष्ठ हिन्दीके प्रचार-प्रसारमें हमारा सहयोग दें अन्यथा ये सभी ‘बुद्धिजीवी’ मिलकर संस्कृत समान हिन्दी भाषाको भी लुप्तप्राय बना देंगे । हिन्दी भाषाको अशुद्ध एवं विकृत स्वरूप देनेवाली पत्रकारिताके इस घृणित स्वरूपको समाजके समक्ष निष्पक्ष होकर प्रस्तुत कर इसमें अपेक्षित सुधार लाना हमारा उद्देश्य है ।
आज www.jansatta.com जालस्थानसे उद्धृत एक समाचारके कुछ अंश आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं । किसी भी पत्रकार या नियतकालिकके विरुद्ध हमारा वैयक्तिक स्तरपर किसी भी प्रकारका वैचारिक मतभेद नहीं है, यह आपको विशेष रूपसे स्पष्ट करना चाहेंगे ।
प्रत्येक वाक्यमें हिन्दी भाषाके हनन हेतु उर्दू या आंग्ल भाषाके शब्दोंका उपयोग किसप्रकार किया जा रहा है, उसका आपको उदाहरण प्रस्तुत करनेका मात्र एक प्रयास कर रहे हैं । अवैदिक शब्दोंको ‘ ‘को चिह्नित किया गया है एवं सभीको इन शब्दोंके उचित वैदिक शब्द ज्ञात हो इसे हेतु उसके साथ संस्कृतनिष्ठ शब्द कोष्ठक ( )में दिए गए हैं । – वैदिक उपासना पीठ
प्रकशित वृत्त इस प्रकार है –
बांग्लादेशी हिंदुओं ने मांगी डोनाल्ड ट्रंप से मदद (सहायता), कहा- इस्लामी कट्टरपंथियों से है खतरा (संकट)
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप को बांग्लादेश में गैर-मुसलमानों (अमुस्लिम) की बचाने के लिए दखल (हस्तक्षेप) देना चाहिए क्योंकि उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों से ‘खतरा’ है।
बांग्लादेशी हिंदुओं ने अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से देश में ‘गैर-मुसलमानों’ की बचाव के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है।
बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार के विरोध में कई बांग्लादेशियों ने न्यूयॉर्क स्थित ट्रंप टावर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का आयोजन बांग्लादेशी मूल के हिंदुओं ने किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप को बांग्लादेश में ‘गैर-मुसलमानों’ की बचाने के लिए ‘दखल’ देना चाहिए क्योंकि उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों से ‘खतरा’ (संकट) है। बांग्लादेश ‘1971’ में पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र देश बना था। इस समय बांग्लादेश में एक करोड़ से अधिक हिंदू रहते हैं। ‘1971’ में अलग देश बनने के बाद पिछले ’40’ ‘सालों’ (वर्षों) में यहां के हिंदुओं की ‘आबादी’ (जनसंख्या) ‘करीब’ (प्रायः) आधी हो गई है ।
ट्रंप टावर के बाहर हुए प्रदर्शन के आयोजकों में एक सितांग्शु गुहा ने मीडिया से कहा, “हमने डोनाल्ड ट्रंप को ‘वोट’ (मत) दिया है और अब हम उन्हें बताना चाहते हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों का ‘लगातार’ (सतत्, निरन्तर) उत्पीड़न हो रहा है और ये रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हम चाहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप कार्यभार संभालने के बाद मानवता के ‘नाते’ (दृष्टिसे, सम्बन्ध के कारण) इस ‘मसले’ (प्रकरण, तथ्य) पर कोई कदम (चरण) उठाएं।” प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप की ‘टीम’ (गुट) को एक विज्ञप्ति भी दी जिसमें ब्राह्मणबरिया और संताल में हुई हत्याओं का ‘जिक्र’ (चर्चा) किया गया है।
नवंबर के पहले ‘हफ्ते’ (सप्ताह) में ब्राह्मणबरिया ‘जिले’ (जनपद) के नासिरनगर ‘इलाके’ (क्षेत्र) में ‘कम से कम’ (न्यूनतम) ’15’ मंदिरों और ’20’ से अधिक मकानों (गृह, निवास, सदन, घर) में तोड़फोड़ की गई है। पुलिस ने ’78’ संदिग्ध ‘हमलावरों’ (आक्रमणकारियों) को ‘गिरफ्तार’ (बन्दी बनाया) किया है और ‘फरार’ (भागे हुए) आरोपियों पर ‘इनाम’ (पुरस्कार, पारितोषिक) रखा है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले ‘हमले’ में पिछले कुछ ‘सालों’ में ‘बढ़ोतरी’ (वृद्धि) हुई है। पिछले कुछ ‘सालों’ में आधा ‘दर्जन’ (द्वादाशक) धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों/लेखकों की इस्लामी चरमपंथी हत्या कर चुके हैं।



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