संस्कृत सभी भारतीय भाषाओंकी माता है। इनकी अधिकांश शब्दावली या तो संस्कृतसे ली गयी है या संस्कृतसे प्रभावित है। पूरे भारतमें संस्कृतके अध्ययन-अध्यापनसे भारतीय भाषाओंमें अधिकाधिक एकरूपता आयेगी जिससे भारतीय एकता बलवती होगी। यदि इच्छा-शक्ति हो तो संस्कृतको हिब्रू की भाँति पुनः प्रचलित भाषा भी बनाया जा सकता है।
• हिन्दू धर्मके प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ संस्कृतमें हैं।
• हिन्दुओंके सभी पूजा-पाठ और धार्मिक संस्कारकी भाषा संस्कृत ही है।
• हिन्दुओंके नाम भी संस्कृतपर आधारित होते हैं।
• भारतीय भाषाओंकी तकनीकी शब्दावली भी संस्कृतसे ही व्युत्पन्न की जाती है।
• संस्कृत, भारतको एकताके सूत्रमें बांधती है।
• संस्कृतका प्राचीन साहित्य अत्यन्त प्राचीन, विशाल और विविधतापूर्ण है। इसमें अध्यात्म, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान, और साहित्यका भण्डार है। इसके अध्ययनसे ज्ञान-विज्ञानके क्षेत्रमें प्रगतिको प्रोत्साहन मिलेगा।
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