सन्त वाणी


जनम मरन सब दुख सुख भोगा । हानि लाभ प्रिय मिलन वियोगा ।
काल करम बस होहिं गोसाईं । बरबस राति दिवस की नाईं ।

अर्थ : जन्म मृत्यु, सभी दुख सुखके भेाग, हानि-लाभ, प्रिय लोगोंसे मिलना या
बिछुडना, समय एवं कर्मके अधीन रात्रि  एवं दिवसकी भांति स्वतः होते रहते हैं । – गोस्वामी तुलसीदास 



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