देवके लिए क्या सम्भव नहीं है ? नदीपर पत्थर तैर सकता है, सूर्यकी किरणोंपर चींटियां चल सकती हैं, आगके पठारोंपर फसल उग सकती है, भीतके (दीवारके) भी पांव निकल सकते हैं और वह चल सकती है, विशाल पर्वत और छोटासा मच्छर समान हो सकते हैं । देवकी कृपासे सृष्टिमें कुछ भी असम्भव, सम्भव हो सकता है ; परन्तु परब्रह्म परमात्मा, गुरुकी कृपासे ही मिल सकता है । – सन्त ज्ञानेश्वर
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