अनुज बधू भगिनी सुत नारी । सुनु सठ कन्या सम ए चारी ।।
इन्हहि कुदृश्टि बिलोकइ जोइ । ताहि बधें कछु पाप न होइ ।।
अर्थ : रे मूर्ख, सुन लो ! छोटे भाईकी स्त्री, बहन, पुत्रकी स्त्री और बेटी, ये चारों एक हैं ।
इनकी ओर जो बुरी दृष्टिसे देखे, उसे मारनेमें तनिक भी पाप नहीं लगता है । – संत तुलसीदास
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