सनातन संस्थाके संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीका गुरुपूर्णिमा निमित्त संदेश
‘भारतमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना, अर्थात् सनातन धर्मराज्यकी पुनर्स्थापना करनेके लिए ‘कालानुसार प्रयत्न करना’, भी एक प्रकारसे समष्टि गुरुकार्य है । आज धर्मनिरपेक्षतावादी, साम्यवादी, बुद्धिवादी और अहिन्दू राजनीतिज्ञ ‘हिन्दू राष्ट्र’, इस शब्दका ही विरोध कर रहे हैं । अध्यात्मका ज्ञान न होनेके कारण वे काल-महिमा, सूक्ष्म जगत, ईश्वरकी कृपा इत्यादि बातें नहीं समझते । वास्तवमें पृथ्वीपर घटनेवाली घटनाएं छोटी होती हैं । स्थूल रूपसे घटनेवाली प्रत्येक घटना सूक्ष्म रूपसे पहले ही घटित हो चुकी होती है । खरा युद्ध देवता और असुरोंमें होता है तथा प्रत्येक युद्धमें देवताओंकी ही विजय होती है । वर्तमानमें पृथ्वीपर सनातन धर्मराज्यकी स्थापनाके लिए चल रहे सूक्ष्म युद्धमें देवताओं और संतोसे भुवलोकसे छठे पातालतककी आसुरी शक्तियां पराजित हो चुकी हैं । भारतमें उनके दृश्य परिणामस्वरूप सर्वत्र तामसिक राजकीय पक्षोंकी पराभव होकर राजसिक राजकीय पक्षोंकी विजय हो रही है । वर्तमानमें देवता और सन्तोंके माध्यमसे सातवें पातालकी शक्तियोंके विरुद्ध चल रहे सूक्ष्म महायुद्धके परिणाम आनेवाले २ – ३ वर्षोंमें पृथ्वीपर दृश्य रूपमें दिखाई देंगे । सातवें पातालकी शक्तियोंसे चल रहा सूक्ष्म युद्ध अंतिम होनेके कारण वह निर्णायक होगा । यह काल हिन्दू धर्मविरोधी शक्तियोंके लिए जितना अनुकूल है, उतना ही हिन्दू धर्मप्रेमियोंके लिए प्रतिकूल है ।
ख्रिस्ताब्द २०१८ के पश्चात सर्वत्र अराजकसदृश स्थिति उत्पन्न होगी । साथ ही तीसरा महायुद्ध और प्राकृतिक आपदाओंके कारण जीवन जीना असह्य हो जाएगा । अनेक दूरदर्शी संतोंने भी कहा है कि ‘भावी काल केवल भारतके लिए ही नहीं, अपितु संपूर्ण जगतके लिए भीषण है ।’ ऐसे भीषण कालका सामना करनेके लिए प्रचंड आत्मबलकी आवश्यकता होती है । यह आत्मबल केवल सन्तोंकी कृपा और साधना करनेपर ही प्राप्त हो सकता है । वर्तमान काल बुरा है, तब भी वर्ष २०२३ के पश्चात काल सनातन धर्मके लिए अनुकूल है । इसी कालमें सत्त्वगुणी लोगोंद्वारा भारतमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना होगी । गुरुपूर्णिमा, साधना हेतु मार्गदर्शक संत और गुरुके चरणोंमें कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है । वास्तवमें केवल कृतज्ञताके लिए गुरुपूर्णिमा मनानेकी अपेक्षा वर्षभर संत और गुरु द्वारा बताई गई साधना करना गुरुतत्त्वको अपेक्षित है । हिन्दुओ, भावी भीषण कालमें जीवित रहनेके लिए संत और गुरुके मार्गदर्शनमें साधना करनेका निश्चय इस वर्षकी गुरुपूर्णिमासे करें !’ – परात्पर गुरु डॉ. आठवले
Leave a Reply