सरसोंके (mustard, सर्षप) पत्ते भारतमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरातमें होने वाली अति पौष्टिक शाक (सब्जी) है । नवम्बरसे मार्च तक ये सरलतासे मिल जाते हैं ।
सरसोंका शाक – सरसोंके पत्तोंसे बना पौष्टिक शाक (साग) पंजाब, हरियाणामें रुचिपूर्वक खाया जाता है । सरसोंके कच्चे पत्तोंको अल्प (कम) उष्ण जलमें अच्छेसे उबालकर पिसा जाता है और स्वादानुसार तडका (छौंक) लगाकर यह शाक बनाया जाता है ।
सरसोंके पत्तेमें पोषक तत्व – सरसोंके पत्ते ‘विटामिन’ और खनिजका भण्डार होते हैं । इनमें प्रचुर मात्रामें ‘विटामिन – ए, सी और के’ होते हैं । यह ‘प्रोटीन’, ‘कार्बोहाइड्रेट’, लौहतत्व, ‘मैग्नेशियम’, ‘कैल्शियम’, तांंबा, ‘पोटैशियम’, ‘सेलेनियम’, ‘फोलेट’का भी अच्छा स्रोत है ।
कई प्रकारके ऑक्सीकरणरोधी (एंटीऑक्सीडेंट) जैसे ‘फ्लेवोनोइड्स’, ‘सल्फोराफेन’, ‘केरोटीन’, ‘ल्यूटिन’ आदि इसमें पाए जाते हैं । इसके अतिरिक्त विटामिन-बी समूहके कई ‘विटामिन’ जैसे फोलिक अम्ल, ‘पाइरोडोक्सिन’, ‘नियासिन’, ‘राइबोफ्लेविन’ आदि होते हैं । इसमें ‘कैलोरी’ और वसा नगण्य मात्रामें होती हैं ।
सेवन विधि – सरसोंके पत्तोंका सबसे अधिक उपयोग इसका शाक बनानेमें होता है । मसालोंका प्रयोग अधिक नहीं करना चाहिए, इससे यह औषधिका ही कार्य करता है ।
आइए, सरसोंके पत्तोंके लाभके विषयमें जानते हैं –
* गर्भावस्थामें – सरसोंके पत्ते गर्भवती महिलाओंके लिए अत्यन्त लाभप्रद हैं, क्योंकि इसमें ‘विटामिन-के’ अधिक मात्रामें पाया जाता है । गर्भवती महिलाओंमें वमन (उल्टी) और मितलीकी समस्या ‘विटामिन-के’की न्यूनताके कारण होती है ।
* विषाक्त पदार्थ – सरसोंमें विद्यमान ऑक्सीकरणरोधी तत्व और ‘सल्फर’ शरीरसे विषाक्त पदार्थोंको हटाते हैं, जिसके कारण हृदय स्वस्थ रहता है और कई अन्य प्रकारके दीर्घकालिक रोगोंको रोकनेमें सहायक होता है ।
* सूजनके लिए – सरसोंमें विद्यमान ‘विटामिन-के’ और ‘ओमेगा -३’में सूजनको न्यून करनेके गुण पाए जाते हैं ।
* कर्करोग (कैंसर) – सरसोंके ऑक्सीकरणरोधी और प्रदाहनाशी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुणोंके कारण यह मूत्राशय, मलाशय, स्तन, फेफडे, ‘प्रोस्ट्रेट’ और अण्डाशयके कर्करोगको रोकनेमें सहायक है ।
* हृदयके लिए – सरसों विभिन्न प्रकारसे हृदयको स्वस्थ रखनेमें सहायक है । यह शरीरसे रक्तवसाके (कोलेस्ट्रॉलके) स्तरको न्यून करनेमें सहायक है और अच्छी मात्रामें ‘फोलेट’ प्रदान करता है, जो ‘होमोसिस्टीन’के निर्माणको रोकता है और हृदय रोगकी समस्यामें योगदान कर सकता है ।
* पाचन प्रक्रियामें – सरसोंमें ‘फाइबर’ पाया जाया जाता है, जो बृहदान्त्रके (मलाशयके) अच्छे स्वास्थ्यके लिए अत्यधिक लाभप्रद होता है । यह चयापचयको नियमित करता है और पाचन प्रक्रियामें सहायक है ।
* अस्थियोंके (हड्डियोंके) लिए – ‘कैल्शियम’ और ‘पोटैशियम’का स्रोत होनेके कारण यह अस्थियोंके लिए अत्यधिक लाभप्रद है ।
* शीतप्रकोप – यह ‘विटामिन-सी’का अच्छा स्रोत होनेके कारण प्रतिरोधक क्षमता बढाकर शीतप्रकोपसे (सर्दी,जुकाम तथा फ्लू) रक्षण करता है ।
सावधानियां – १. सरसोंका शाक प्रातःकालमें बना हुआ संध्यामें और संध्याका बना प्रातःकालमें पुनः गर्म करके नहीं खाना चाहिए । इसमें उपस्थित ‘नाइट्रेट’ जीवाणुके कारण विषैले तत्व ‘नाइट्रोसेमाइन’में परिवर्तित हो सकते हैं, जो स्वास्थ्यके लिए हानिकारक होते हैं ।
२. यदि रक्तको पतला करनेकी औषधि ले रहे हों तो सरसोंके पत्तोंका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ‘विटामिन-के’की मात्रा औषधिके प्रभावको न्यून कर सकती है ।
३. यदि पथरीकी समस्या हो तो सरसोंके पत्तोंका उपयोग सावधानीसे या चिकित्सकसे परामर्श लेनेके पश्चात ही करना चाहिए ।
४. यदि ‘थायराइड’की समस्या हो तो सरसोंके पत्तोंका उपयोग नहीं करना चाहिए । इसमें पाए जानेवाले तत्व ‘थायराइड’ अंतःस्रावके (हार्मोनके) निर्माणमें बाधा बन सकते हैं ।
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