वर्तमान कालमें प्रायः हम हिन्दी बोलते अथवा लिखते समय सहज ही उर्दू एवं अन्य विदेशी भाषाओंसे उद्धृत शब्दोंका प्रयोग करते रहते हैं । वैदिक संस्कृति सत्त्व गुण आधारित है एवं संस्कृतनिष्ठ हिन्दी ही सात्विक भाषा है। उर्दू एवं अन्य विदेशी भाषाओंसे उद्धृत शब्दोंका प्रयोग करनेसे हमारी हिन्दी भाषाकी सात्त्विकता नष्ट होती जा रही है; अतः संस्कृतनिष्ठ हिन्दीका प्रयोग कर, भाषाके प्रति अपने धर्मका निर्वाह करें !
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