जुलाई १८, २०१८
केरलके सबरीमाला मन्दिरमें महिलाओंके प्रवेशपर प्रतिबन्दको लेकर उच्णतम न्यायालयने आज कडी टिप्पणीकी है । न्यायालयने कहा है कि देशमें निजी मन्दिरका कोई सिद्धान्त नहीं है । मन्दिर निजी नहीं, बल्कि सार्वजनिक सम्पत्ति है, जिसमें कोई भी जा सकता है । न्यायालयने कहा कि पुरुषोंकी भांति महिलाओंको भी मन्दिरमें जानेका अधिकार है ।
बता दें कि सबरीमालाके प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मन्दिरमें १० वर्षसे ५० वर्षतकके आयुकी महिलाओंके प्रवेशपर प्रतिबन्ध है । महिलाओंके उस समूहको मन्दिरमें प्रवेशसे रोका जाता है, जिन्हें मासिकधर्म होता है । ऐसा माना जाता है कि भगवान अयप्पा एक ‘नास्तिक ब्रह्मचारी’ थे और इस कारण रजस्वला महिलाओंका मन्दिरमें प्रवेश वर्जित है ।
मन्दिर प्रबन्धकके इस निर्णयका सामाजिक संगठन और महिलाएं पुरजोर विरोध कर रही हैं । ऐसेमें उच्चतम न्यायालयकी यह टिप्पणी उन महिलाओंके लिए काफी लाभप्रद होगी जो मन्दिरमें पूजा करनेकी इच्छुक तो हैं; लेकिन उन्हें प्रवेश करनेसे रोक दिया जाता है ।
स्रोत : अमर उजाला
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