पश्चिम बंगालमें ‘बुर्का’ पहननेसे मना करनेपर मुसलमान जनसमूहने विद्यालयपर किया आक्रमण, ममता शासनमें प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) निलम्बित, विभागीय जांच आरम्भ


१३ फरवरी, २०२२
      ममता बनर्जीके राजमें पश्चिम बंगाल कट्टरपन्थियोंका गढ बनता जा रहा है । कर्नाटकसे आरम्भ हुआ ‘हिजाब’ प्रकरण पश्चिम बंगालमें पहुंचकर हिंसक हो गया है ।
      वर्ष २०११ की जनगणनाके अनुसार, ६६ प्रतिशत मुसलमान जनसंख्यावाले मुर्शिदाबाद जनपदके सुती क्षेत्रमें ‘बहुतली हाईस्कूल’के ‘हेडमास्टर’ दीनबंधु मित्राने शुक्रवारको (११ फरवरीको) विद्यालयकी कुछ छात्राओंसे कहा था कि विद्यालयमें ‘हिजाब’ या ‘बुर्केके स्थानपर विद्यालयके गणवेश (स्कूल यूनिफॉर्म) पहनकर आएं ! प्रतिवेदनके अनुसार, मित्राने यह भी कहा था कि जो लडकी इस आदेशको नहीं मानेगी, उसका नाम विद्यालयके पंजीकरणसे (रजिस्ट्रीसे) हटा दिया जाएगा । इसके पश्चात लडकियोंने अपने परिजनको इसके विषयमें बताया और स्थानीय मुसलमानोंके जनसमूहने विद्यालयको घेर लिया। इस मध्य विद्यालयमें ‘बम’ फेंकनेका भी समाचार है ।
       ‘पुलिस’ने शनिवार सन्ध्या विलम्बतक हिंसक जनसमूहसे बचनेके लिए स्वयंको विद्यालयके कक्षमें बन्द किए हुए ‘हेडमास्टर’ और ‘स्टाफ’को बचाया । अधिकारियोंके अनुसार, ‘हेडमास्टर’को निलम्बितकर दिया गया है और उनके विरुद्ध विभागीय जांच आरम्भ की गई है । कुछ स्थानीय लोगोंका कहना है कि छात्राओंको विद्यालयकी ओरसे गणवेश दी गई है और शिक्षक उन चित्रोंको जनपद प्रशासनको भेजनेवाले हैं; इसलिए छात्राओंको ‘बुर्के’के स्थानपर गणवेश पहननेको कहा गया था । इस प्रकरणमें ‘पुलिस’ने १८ लोगोंको बन्दी बनाया है और अन्य लोगोंकी खोज की जा रही है ।
     यह तो पूर्वसे ही स्पष्ट था कि मुख्यमन्त्री ममताके गढमें मुसलमानोंका बहुमत है; परन्तु अब यह सार्वजनिक रूपसे भी सामने आने लगा है । देशको ममता बनर्जी जैसे नेताओंके हाथमें जानेसे रोकनेके लिए, अब हिन्दुओंका संगठित होना होगा । यही अब भारतकाको बचानेका अन्तिम पर्याय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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