शवोंकी राजनीति अन्तर्गत जांचे गए गंगाजलमें नहीं मिले कोरोना विषाणुके कण
०९ दिसम्बर, २०२१
वर्ष २०२१ के आरम्भिक माहमें कोरोना महामारी जब अपने उच्च स्तरपर थी । उसी मध्य उत्तर प्रदेशमें गंगा नदीमें बहते शवोंके छायाचित्र साझा किए गए थे व बताया गया था कि कोरोना महामारीसे मृत हुए व्यक्तियोंकी संख्याको छुपानेके लिए मृतकोंके शवोंको गंगाजलमें फेंक दिया गया है । वहीं राज्यके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथके शासनको भी इस प्रकरणका दोषी बताया गया था । अब वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (सीएसआईआर) एवं ‘इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रिसर्च’ (आईआईटीआरके) वैज्ञानिकोंकी एक समितिने गंगा नदीके उन ‘नमूनों’की जांच की है । वैज्ञानिक परिक्षणके पश्चात इस निष्कर्षपर पहुंचे हैं कि इसमें कोरोना संक्रमणके विषाणु नहीं हैं । गंगाजलके यह ‘सैम्पल’ २०२० में उत्तरप्रदेश और बिहारके गंगा नदीतटसे लिए गए थे, जिसकी जांचके परिणाम अब प्राप्त हुए हैं । १२० पृष्टोंकी ‘रिसर्च स्टडी’के आधारपर ‘द न्यू इण्डियन’ने अपने समाचारमें बताया कि पृथक-पृथक स्थानोंसे लिए गए गंगानदीके जलका ‘आरटी’ ‘पीसीआर’ जांचके माध्यमसे परीक्षण किया गया और सभी ‘सैंपल्स’की जांचकी गई । सभी ‘नमूनों’में विषाणु जलमें अनुपस्थित बताए गए हैं । यह ‘सैंपल’ कन्नौज, उन्नाव, कानपुर, प्रयागराज, पटना भोजपुरमें गंगा नदीसे लिए गए थे । ‘मीडिया’द्वारा भी इन शवोंकी मृत्युका कारण कोरोना बताया गया था । वहीं उत्तरप्रदेश शासनके प्रवक्ता राकेश त्रिपाठीने कांग्रेसपर आरोप लगाते हुए कहा है कि राहुल गांधीके नेतृत्ववाली कांग्रेसका यह षड्यन्त्र ‘टूलकिट गैंग’का नियोजन था । उन्होंने शवोंके ऊपर राजनीति इसलिए कि जिससे शवोंके चित्र दिखाकर भयका वातावरण उत्पन्न किया जाए; यद्यपि वैज्ञानिकोंके अध्ययनमें परिणामोंसे कुछ भिन्न ही निष्कर्ष प्राप्त हुआ हैं ।
समाचार स्पष्ट करता है कि किस प्रकार शवोंके माध्यमसे भी राजनीतिकर, आजके कथित राजनेता सत्ता प्राप्तिके अवसर ढूंढते हैं । क्या ऐसे राजनेताओंके शासनमें हम कभी रामराज्यकी कल्पना कर सकते हैं ? सभी हिन्दू इसपर अवश्य विचार करें एवं ऐसे राजनेताओंको मत व समर्थन न दें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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