धर्मनिरपेक्षतासे मुसलमानोंको कुछ नहीं मिला, शीघ्र विवाहकर बच्चोंको जन्म दे’, ओवैसीने कहा, “इससे मस्तिष्क भी चिन्तामुक्त रहता है”
१३ दिसम्बर, २०२१
‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमिन’के मुखिया और हैदराबादसे सांसद असदुद्दीन ओवैसीने मुसलमान युवाओंको विवाह करनेका परामर्श देते हुए कहा है कि पत्नी घरमें रहती है तो मस्तिष्क भी चिन्तामुक्त रहता है । इसके साथ ही उन्होंने मुसलमानोंको धर्मनिरपेक्षताका पालन नहीं करनेका परामर्श दिया । उनके भाषणका यह भाग सामाजिक जालस्थलपर तीव्रतासे सार्वजनिक हो रहा है ।
प्रतिवेदनके अनुसार, ओवैसी रविवार, १२ दिसम्बरको मुंबईमें तिरंगा यात्राको सम्बोधित कर रहे थे । इसी मध्य उन्होंने लोगोंको सम्बोधित करते हुए कहा, “विवाह करेंगे न ? अविवाहित नहीं रहना ।” अविवाहित व्यक्ति बहुत व्यथित रहते हैं । मुसलमानोंको शीघ्र विवाह और बच्चोंको जन्म देनेका परमर्श देते ओवैसीने कहा, “जो १८-१९ वर्षके युवा हैं, वे शीघ्र विवाह कर लेंगे तो उनके बच्चे होंगे । विवाह करोगे न ?” ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमिन’के सांसदने कहा कि यदि घरमें पत्नी रहती है, तो व्यक्तिका मस्तिष्क चिन्तामुक्त रहता है ।
असदुद्दीन ओवैसीने धर्मनिरपेक्षताको निरर्थक बताया । उन्होंने कहा, “मैं भारतके मुसलमानोंसे पूछना चाहता हूं कि हमें धर्मनिरपेक्षतासे क्या मिला ? क्या हमें धर्मनिरपेक्षतासे आरक्षण मिला ? क्या ‘मस्जिद’ गिरानेवालोंको दण्ड मिला ? नहीं ! किसीको कुछ नहीं मिला । मैं संवैधानिक धर्मनिरपेक्षतामें विश्वास करता हूं, न कि राजनीतिक धर्मनिरपेक्षतामें । कृपया, मुसलमान राजनीतिक धर्मनिरपेक्षतासे दूर रहें !”
ओवैसी मुसलमानोंको विवाहका परामर्श दे रहा है; जबकि इस्लाममें विवाह नामक कोई संस्कार है ही नहीं, केवल एक परस्पर अनुबन्ध होता है, जिसे ‘निकाह’ कहते हैं । वस्तुतः इस माध्यमसे वह मुसलमानोंको उनकी जनसंख्या बढानेके लिए उकसा रहा है, जिसका घातक परिणाम हिन्दुओंको भोगना होगा; अतः हिन्दू अब भी जाग जाएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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