आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – १९)


सेंधा नमक (अंग्रेजी नाम – Rock salt, संस्कृत नाम – सैंधवा, शीतशिवा, अन्य नाम – सैन्धव नमक, लाहौरी नमक) एक प्रकारका खनिज नमक (रॉक साल्ट) है, जो पाकिस्तानके पंजाब प्रान्तके झेलम जनपदके खेवरा खानोंसे (माइंससे) निकलता है । यह हल्की लालीके साथ श्वेत (सफेद) नमक होता है । कभी-कभी अन्य पदार्थोंकी उपस्थितिसे इसका वर्ण (रंग) हल्का नीला, गाढा नीला, जामुनी, गुलाबी, नारंगी, पीला या भूरा भी हो सकता है । इसे ‘लाहौरी नमक’ भी कहा जाता है; क्योंकि यह पाकिस्तानमें अधिक मात्रामें मिलता है । आयुर्वेदकी औषधियोंमें इसका उपयोग होता है । सेंधा नमककी सबसे बडी समस्या है कि भारतमें यह अल्प मात्रामें होता है । यह समुद्री नमकसे तुलनात्मक अल्प नमकीन होता है; अतः इसका अधिक उपयोग करना पडता है ।
घटक – सेंधा नमकमें ‘सोडियम क्लोराइड’ सबसे प्रमुख घटक है । सोडियमके अतिरिक्त इसमें ‘फास्फोरस’, ‘कैल्शियम’, ‘पोटैशियम’, लोहा, ‘मैग्नीशियम’, जस्ता, ‘सेलेनियम’, तांबा, ‘ब्रोमिन’, ‘जिरकोनियम’ और ‘आयोडीन’ पाए जाते हैं ।
सेवन विधि – आयोडीनयुक्त नमककी भांति सेंधा नमकका भी उपयोग भोजन पकानेके लिए किया जा सकता है ।
स्वादके अनुसार सेंधा नमकको खानेमें मिलाएं । सेंधा नमकको शुद्ध माना जाता है; इसलिए इसका उपयोग अनेक धार्मिक क्रियाओंके समय भोजन पकानेके लिए किया जाता है । आयुर्वेदके अनुसार, इसे दैनिक उपयोगमें लेनेका परामर्श दिया जाता है ।
निर्माण विधि – यह उच्चतम गुणवत्तावाले, कच्चे प्राकृतिक खनिजोंसे बनता है । इस नमकको खानोंसे काटकर बनाया जाता है; इसलिए इसे ‘रॉक सॉल्ट’ भी कहते हैं, इसे कूटने या पीसनेके पश्चात यह श्वेत और हल्का गुलाबी हो जाता है ।
सेंधा नमकका त्रिदोषपर (वात, पित्त और कफ) प्रभाव – नमकका स्वाद सामान्यतः पित्त दोषको बढाता है, परन्तु सेंधा नमक, शीत प्रकृति होनेके कारण पित्त दोषको सन्तुलित करनेमें सहायक है । अपने नमक स्वादके कारण यह वातको सन्तुलित करता है । छातीमें बलगम जमा होनेके कारण यह रक्त संचयमें लाभ देता है; क्योंकि यह कफ दोषसे भी लाभप्रद है, इसलिए यह दुर्लभ आयुर्वेदिक पदार्थोंमेंसे एक है, जो तीनों दोषोंको सन्तुलित करता है ।
आइए, इसके लाभके विषयमें जानते हैं –
* पाचन क्रिया – इसमें औषधीय गुण हैं, जिसके कारण ये पाचन क्रियाको बढानेमें सहायक है । यह औषधिकी भांति कार्य करता है, जिससे पाचनमें सुधार आता है ।
सेंधा नमक क्षारीय गुणके कारण उदरमें अम्लके उत्पादनको अल्प करता है और इसप्रकार जलनको रोकता है । आयुर्वेदके अनुसार, सेंधा नमकको काली मिर्च, अदरक और दालचीनीके साथ प्रयोग करनेसे भूखमें सुधार आता है । सेंधा नमक और ताजा पुदीनेके पत्तोंको छाछमें (लस्सीमें) मिलाकर पीनेसे पाचनमें सुधार आता है ।
* वायुविकारके (गैसके) लिए – सेंधा नमकको व्यापक रूपसे ‘हिंगवस्तक चूर्ण’ जैसी कई प्रकारकी औषधियोंमें घटकके रूपमें प्रयोग किया जाता है ।
* निम्न रक्तचापके लिए – नमक रक्तचापको बढानेमें सहायक है, यह सर्वविदित है; इसके लिए सेंधा नमकका उपयोग किया जा सकता है । निम्न रक्तचापमें, एक गिलास जलमें आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाकर दिनमें दो बार पी सकते हैं ।
* ‘साइनस’में – इसके सेवनसे ‘साइनस’की पीडामें लाभ मिलता है । इसके साथ ही सेंधा नमकके गरारे (गार्गल) करनेसे गलेमें सूजन, वेदना, सूखी खांसी और गलतुण्डिकामें (टॉन्सिलमें) लाभ मिलता है । जो लोग श्वसनीशोथ (ब्रोंकाइटिस) या श्वाशकी अन्य समस्याओंसे पीडित होते हैं, उन्हें सेंधा नमक और हल्दीकी भाप लेना लाभप्रद सिद्ध हो सकता है ।
* स्नानके समय प्रयोग – इसमें कई ऐसे गुण होते हैं, जो शरीरके लिए लाभकारी होते हैं । स्नानके जलमें एक चम्मच सेंधा नमक मिला लें और उसे प्रयोग करें, इससे स्नान करनेसे लाभ मिलेगा । यह गलेकी मांसपेशियोंको शान्त करता है और साथ ही शरीरको विषमुक्त करता है ।
* शरीर शुद्धि हेतु प्रयोग – पैरोंसे गंदगी और दुर्गन्धको दूर करनेके लिए आधी बाल्टी गुनगुने जलमें २ चम्मच सेंधा नमक मिलाए और उसमें अपने पांव डाल दें और इसे १५ मिनट तक रखें, इससे मांसपेशियोंको लाभ मिलेगा व शरीरसे विषाक्त पदार्थ बाहर आ जाएंगें ।
* ‘इलेक्ट्रोलाइट्स’की न्यूनतामें – ‘इलेक्ट्रोलाइट्स’  शरीरके लिए अत्यधिक आवश्यक हैं । इनके बिना शरीरको अपना कार्य पूर्ण करनेमें अडचन आती है । प्रतिदिन सेंधा नमकका सेवन ‘इलेक्ट्रोलाइट्स’की न्यूनता नहीं होने देता है और शरीरके ‘पीएच’के (अम्ल मापक) स्तरको बनाए रखता है ।
सावधानियां –
१. गर्भवती महिलाओंको सेंधा नमकका सेवन थोडा अल्प प्रमाणमें करना चाहिए ।
२. उच्च रक्तचापमें इसका प्रयोग अल्प प्रमाणमें करना चाहिए ।



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