
उत्तर – हमारे कष्ट प्रारब्धके कारण है या पितृ दोषके कारण, यह मात्र सन्त ही बता सकते हैं | यदि कष्ट पितृ दोषके कारण है तो उसके निवारण हेतु प्रयास करनेपर हमारे कष्ट कम हो जाते हैं या दूर हो जाते हैं जैसे एक वर्ष पूर्व कोलकातामें एक परिवारसे मिली उनके वहां तीन पीढीसे तीव्र पितृ दोषके कारण वंश वृद्धि रुक गयी थी; परंतु योग्य प्रकारसे साधना करनेपर उनके घर एक पुत्रने जन्म लिया | यदि प्रारब्धमें बच्चे नहीं हैं तो उस कष्टपर मात पाना अत्यंत कठिन होता है, ऐसे दंपति किसी उच्च कोटिके संतकी सेवा कर , यदि उन्हें प्रसन्न कर ले तब संतान प्राप्तिकी संभावना बन सकती है, क्योंकि ऐसा हो सकता है कि संत उनकी भक्ति से प्रसन्न हो उन्हें आशीर्वाद दे दे और उन्हें बच्चे हो जाए; परंतु ऐसा विरले ही होता है | उच्च कोटिके संत जन्म, मृत्यु और विवाहमें हस्तक्षेप नहीं करते मात्र यदि कोई उन्हें अपनी भक्ति भावसे प्रसन्न कर दे तो वे कुछ भी आशीर्वाद देनेकी क्षमता रखते हैं | – तनुजा ठाकुर
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