हरो यद्युप्देष्टा ते हरि: कमलजोsपि । तथापि न तव स्वास्थ्यम् सर्वविस्मरणादृते ।। – अष्टावक्र गीता
अर्थ : चाहे साक्षात भगवान शिव, कृष्ण या कमलसे जन्मे ब्रह्मा हमारे उपदेशक हों जब तक हम भूतकालके सर्व संस्कारोंका विस्मरण नहीं करते तब तक हम आत्मतत्त्वमें स्थित नहीं हो सकते हैं ।
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