शास्त्र वचन


यथा  मधु समादत्ते रक्षन्  पुष्पाणि  षट्पदः।
तद्वदर्थान् मनुष्येभ्यः आदद्यात् अविहिंसया॥
अर्थ : जैसे भौंरा पुष्पोंका रक्षणकर उनमेंसे मधु लेता है, वैसे ही राजाने अहिंसासे प्रजाके पाससे धन (कर) लेना चाहिए ।


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