शास्त्र वचन
प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये ।
बन्धं मोक्षं च या वत्ति बुद्धि: सा पार्थ सात्त्विकी ।।
अर्थ : हे पार्थ ! जो बुद्धि प्रवृतिमार्ग और निवृतिमार्गको, कर्तव्य और अकर्तव्यको, भय और अभयको तथा बन्धन और मोक्षका यथार्थ जानती है, वह बुद्धि सात्त्विक होती है ।
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