शास्त्र वचन


गुरु शुश्रूषया विद्या पुष्कलेन् धनेन वा।
अथ वा विद्यया विद्या चतुर्थो न उपलभ्यते॥

अर्थ : विद्या गुरुकी सेवासे, पर्याप्त धन देनेसे अथवा विद्याके आदान-प्रदानसे प्राप्त होती है । इसके अतिरिक्त विद्या प्राप्त करनेका चौथा तरीका नहीं है॥



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