शास्त्र वचन


महाजनस्य संसर्गः कस्य नोन्नतिकारकः।
पद्मपत्रस्थितं तोयम् धत्ते मुक्ताफलश्रियम् ॥
अर्थ : महापुरुषोंका संग किसके लिए लाभदायक नहीं होता,कमलके पत्तेपर पडी हुई जलका बूंद मोती जैसी शोभा प्राप्त कर लेता है ।



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