साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू॥
जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा॥ – बालकांड, रामचरितमानस
अर्थ : संतोंका चरित्र कपासके चरित्र (जीवन) के समान शुभ है, जिसका फल नीरस, विशद और गुणमय होता है जिस कारण वे वंदनीय और यशस्वी होते हैं ।
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