शास्त्र वचन


यत्र विद्वज्जनो नास्ति श्लाघ्यस्तत्राल्पधीरपि ।
निरस्तपादपे देशे एरण्डोऽपि द्रुमायते ॥

अर्थ : जहां विद्वान पुरुष नहीं होते वहां एक मंद बुद्धिवाला भी  प्रशंसा प्राप्त  करता है  जैसे जहां वृक्ष नहीं होते वहां एरण्डका पौधा भी वृक्ष प्रतीत होता है |



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