मनुष्य बन्धनमुक्त कब होता है ?


यदि देहं पृथक्कृत्य चिति विश्रामस्य तिष्ठसि । अधुनैव सुखी शान्त: बन्धु मुक्तो भविष्यसि ।। – अष्टावक्र गीता (१: ४)        
अर्थ : यदि तुम अपने आपको देहसे अनासक्त कर दोगे और चित्तमें स्थिर कर दोगे  तब उसी क्षण तुम सुखी शांत और बंधनमुक्त हो जाओगे !



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