दान देते समय कैसी प्रवृत्ति होनी चाहिए ?


हरिः सर्वेषु भूतेषु भगवानास्त ईश्वरः । इति भूतानि मनसा कामैस्तै: साधु मानयेत् ॥ – श्रीमद्भागवतपुराणम् (७:७:३२)            
अर्थ : समस्त भूत-प्राणियोंमें सर्वेश्वर भगवान श्रीहरि विराजमान हैं, यों अपने मनमें समझते हुए उन सबको इच्छानुसार वस्तुएं देकर भली-भांति सम्मानित करना चाहिए ।
भावार्थ : जब हम किसी व्यक्तिको भावनाके आधारपर वस्तुएं देते हैं तो उससे पुण्य निर्माण होता है परन्तु जब हम किसीको नारायणका स्वरुप मानकर कुछ भी अर्पित करते हैं तो उससे हमारी साधना होती है और हम पाप और पुण्यसे परे जाते हैं । अतः दान देते समय अपनी प्रवृत्तिकी जांच अवश्य करनी चाहिए । – तनुजा ठाकुर



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