श्रुत्वा धर्मम्विजानाति श्रुत्वा त्यजति दुर्मतिम् ।
श्रुत्वा ज्ञानमवाप्नोति श्रुत्वा मोक्षमवाप्नुयात् ।।
– चाणक्य नीति
अर्थ : धर्मका श्रवण करनेसे जानकारी मिलती है, धर्मके ज्ञानसे कुमति दूर होती है, धर्मका चिंतन करनेसे अज्ञानता दूर होती है और धर्मका अध्ययन करनेसे मोक्ष मिलता है !
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