पेलवं शरदीवाभ्रमस्नेह एव दीपक:। तरंगक इवालोलं गतमेवोपलक्ष्यते ।। – श्री वशिष्ठदर्शनं (१-१४-६)
अर्थ : जीवन शरद ऋतुके बादल समान भ्रमित करनेवाले एवं क्षणिक होता है । यह बिना तेलके दीपक समान होता है । यह एक उफनते तरंग समान होता है जिसका समाप्त होनेपर ही उसका ध्यान आता है ।
Leave a Reply