जलान्तश्चन्द्रचपलं जीवनं खलु देहिनाम् । तथाविधिमिति त्वाशाश्वत्कल्याणमाचरेत् ।।
अर्थ : जिस प्रकार चन्द्रका प्रतिबिंब अस्थिर होता है उसी प्रकार मनुष्यका जीवन भी अनिश्चित और अस्थिर होता है । विधिके इस विधानको जानते हुए मनुष्यने ऐसे कार्य करते रहना चाहिए जिससे समाजका शाश्वत कल्याण हो ।
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