चौपाई :
* भायँ कुभायँ अनख आलस हूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ॥
सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा॥1॥ – रामचरितमानस
अर्थ :-अच्छे भावसे (प्रेमसे) , बुरे भावसे (बैरसे ) , क्रोधसे या आलस्य से, किसी प्रकारसे भी नाम जपनेसे दसों दिशाओंमें कल्याण होता है । उसी (परम कल्याणकारी) राम नामका स्मरण करके और श्री रघुनाथजीको मस्तक नवाकर, मैं रामजीके गुणोंका वर्णन करता हूं ।
(अर्थात् जिस प्रकार अग्निमें कोई भी वस्तुको हम जान बूझ कर डालें या वह अनजाने में गिर जाये , अग्नि दोनों को भस्म कर देती है उसी प्रकार ईश्वरका नाम हम जिस भी भावसे लें, वह हमारा कल्याण करती ही हैं; अतः मेरी श्रद्धा बढेगी तब मैं नामजप आरंभ करूंगा / करूंगी ऐसा न करें आज और इसी क्षणसे नामजप आरंभ करें । – पूज्या तनुजा ठाकुर
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