संतसंगकी महिमा


यथोपश्रयमाणस्य भगवन्तं विभावसुम्।
शीतं भयं तमोऽप्येति साधून् संसेवतस् तथा।।         

अर्थ : अग्निका आश्रय लेनेवाले को ठंड, अंधकार या भय नहीं रहता, उसी प्रकार संतोंकी सेवा करने वालेको पापरुपी शीत, जन्म-मृत्यु रुपी भय और अज्ञानरुपी अन्धकार नष्ट हो जाता है ।

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निमज्योन्मज्जतां घोरे भवाब्धौ परमायनम्।
संतो ब्रह्म-विदः शांता नौर् दृढेवाप्सु मज्जताम्।।

अर्थ : जैसे पानीमें डूबने वालोंको दृढ नौका तार देती है, वैसे ही भयंकर भवसागरमें गोते खानेवालेके लिए ब्रह्मवेत्ता, शांत संत, उत्तम आधार हैं ।

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अन्नं हि प्राणिनां प्राण आर्तानां शरणं त्वहम्।
धर्मो वित्तं नृणां प्रेत्य संतोऽर्वाग् विभ्यतोऽरणम्।।

अर्थ : अन्न प्राणियोंका जीवन है, दुःखियोंका आधार, मैं परमेश्वर हूं, धर्म ही परलोकके लिए मनुष्यकी पूंजी है और संसारसे भयभीत लोगोंके लिए संतजन ही परम आधार है ।

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प्रायेण भक्ति-योगेन सत्संगेन विनोद्धव।
नोपायो विद्यते सघ्रूयं प्रायणं हि सतामहम्।।

अर्थ : हे उद्धव! साधुओंकी संगति होनेपर जो भक्तियोग साधता है, प्रायः उसके सिवा मेरी प्राप्तिका दूसरा अच्छा उपाय नहीं; क्योंकि मैं ही संतोंके माध्यमसे अंतिम गति हूं ।

संत संगकी महिमा अपार है, शास्त्र कहता है
यथोपश्रयमाणस्य भगवन्तं विभावसुम्।
शीतं भयं तमोऽप्येति साधून् संसेवतस् तथा।।

अर्थ : अग्निका आश्रय लेनेवाले को ठंड, अंधकार या भय नहीं रहता, उसी प्रकार संतोंकी सेवा करने वालेको पापरुपी शीत, जन्म-मृत्यु रुपी भय और अज्ञानरुपी अन्धकार नष्ट हो जाता है ।

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निमज्योन्मज्जतां घोरे भवाब्धौ परमायनम्।
संतो ब्रह्म-विदः शांता नौर् दृढेवाप्सु मज्जताम्।।

अर्थ : जैसे पानीमें डूबने वालोंको दृढ नौका तार देती है, वैसे ही भयंकर भवसागरमें गोते खानेवालेके लिए ब्रह्मवेत्ता, शांत संत, उत्तम आधार हैं ।

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अन्नं हि प्राणिनां प्राण आर्तानां शरणं त्वहम्।
धर्मो वित्तं नृणां प्रेत्य संतोऽर्वाग् विभ्यतोऽरणम्।।

अर्थ : अन्न प्राणियोंका जीवन है, दुःखियोंका आधार, मैं परमेश्वर हूं, धर्म ही परलोकके लिए मनुष्यकी पूंजी है और संसारसे भयभीत लोगोंके लिए संतजन ही परम आधार है ।

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प्रायेण भक्ति-योगेन सत्संगेन विनोद्धव।
नोपायो विद्यते सघ्रूयं प्रायणं हि सतामहम्।।

अर्थ : हे उद्धव! साधुओंकी संगति होनेपर जो भक्तियोग साधता है, प्रायः उसके सिवा मेरी प्राप्तिका दूसरा अच्छा उपाय नहीं; क्योंकि मैं ही संतोंके माध्यमसे अंतिम गति हूं ।



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