त्रिदण्डमेतन्निक्षिप्य सर्व भूतेषु मानव: । काम क्रोधो तु संयम्य ततः सिद्धिं नियच्छति ।। – मनुस्मृति
अर्थ : यदि मनुष्य सभी जीवोंपर तीनों – मन , शरीर और वाणीके माध्यमसे दंडोंका पालन करता है अर्थात वह मन, वचन और वाणीद्वारा किसी भी प्राणीको कष्ट नहीं देता तथा काम, क्रोधपर संयम कर लेता है तो वह सिद्धिको प्राप्त कर लेता है ।
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