सुख प्राप्ति


परस्य पीडया लब्धं धर्मस्योल्लंघनेन च आत्मावमानसंप्राप्तं न धनं तत् सुखाय वै || – महाभारत                                        

अर्थ : दुसरोंको दु:ख देकर, धर्मका उल्लंघन करकर या स्वयंका अपमान सहकर मिले हुए धनसे सुख नहीं प्राप्त होता है |



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