शास्त्र वचन


शान्ति तुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात्परं सुखम् । न तृष्णायाः परो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः  ।।  –  चाणक्य नीति

अर्थ : शांति समान कोई तप नहीं होता संतोष समान कोई सुख नहीं होता।  तृष्णा (लोभ ) समान कोई व्याधि नहीं होती और करुणा समान कोई धर्म नहीं होता ।

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution