याचना क्यों न करें ?


देहीति वचनद्वारा देहस्था पञ्च देवता: । तत्क्षणादेव लीयन्ते र्धीह्र्रीश्र्रीकान्र्तिकीर्तय: ॥                                                                 
अर्थ : ‘दे’ इस शब्दके साथ, याचना करनेसे देहमें स्थित पांच देवता, बुद्धि, लज्जा, लक्ष्मी, कान्ति और कीर्ति उसी क्षण देह छोडकर चली जाती है ।
भावार्थ : मांगनेकी प्रवृत्ति अहितकारी होती है । इसीलिए हमारी संस्कृतिमें त्यागको विशेष महत्त्व है , जहां याचनासे सर्व क्षीण होता है वहीं त्यागसे सर्व प्राप्त होता है | जिसमें जो पात्रता होती है ईश्वर उन्हें स्वतः ही देते हैं । लोभी व्यक्ति सदैव अतृप्त रहता है । जिनमें सभीसे अपेक्षा होती है, वह अपेक्षाके पूर्ण न होनेपर दु:खी रहता है । एक कहावत है बिन मांगे मोती मिले और मांगे मिले न भीख अतः मांगना टालना चाहिए एवं ईश्वरने जो दिया है उसीमें कृतज्ञताके भावसे जीवन यापन करना चाहिए । – तनुजा ठाकुर


Comments are closed.

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution