शिव स्तुति


देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गम् कामदहम् करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गम् तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥
अर्थ :
उस शाश्वत एवं करुणाकर शिवलिंगको मैं प्रणाम करती हूं जिनकी अर्चना देवता, ऋषि-मुनि करते हैं, जिन्होंने  कामदेवका दहन किया एवं जिसने रावणके अहंकारको नष्ट किया ।



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