शिव स्तुति
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥
अर्थ : कब मैं श्री गंगाजीके कछारकुंजमें निवास करता हुआ, निष्कपटी होकर सिरपर अंजलि धारण किए हुए चंचल नेत्रोंवाली ललनाओंमें परम सुंदरी पार्वतीजीके मस्तकमें अंकित शिवमंत्र उच्चारण करते हुए परम सुखको प्राप्त करूंगा ?
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