श्रीगुरु उवाच
हास्यास्पद बुद्धिप्रामाण्यवादी
जैसे यदि नेत्रहीन कहे कि ‘दृष्टि जैसा कुछ होता ही नहीं’ या जिसने सूक्ष्मदर्शक यन्त्र(माइक्रोस्कोप) न देखा हो और वह कहे कि ‘वैसा कुछ होता ही नहीं’, यह कथन जितना हास्यास्पद है, उससे अधिक हास्यास्पद तथाकथित बुद्धिप्रामाण्यवादियोंका यह कथन है, कि ‘सूक्ष्म जगत, मृत्योत्तर जीवन जैसा कुछ नहीं होता ।’ – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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