श्रीगुरु उवाच
नेत्रहीन कहता है, दृश्य जगत नामक ऐसा कुछ नहीं है । उसी प्रकार अन्धश्रद्धा निर्मूलन समितिवाले और बुद्धिप्रमाणवादी कहते हैं कि सूक्ष्म जगत, भूत इत्यादि कुछ नहीं; इसलिए कि उन्हें सूक्ष्म विषय समझनेकी जिज्ञासा ही नहीं होती और उनमें सूक्ष्म जगत अनुभव करनेके लिए जो साधना करनी होती है, उसे करनेकी उनकी क्षमता भी नहीं होती है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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