श्रीगुरु उवाच
व्यक्तिकी असहाय स्थितिका लाभ उठाकर उसे ‘अपनी सुरक्षा क्रय करें’ ऐसा कहनेवाली पुलिस तथा राज्यकर्ता हिन्दू राष्ट्रमें नहीं होंगे । किसी व्यक्तिको अपना जीवन असुरक्षित लगनेपर, वह व्यक्ति पुलिसके पास जाकर सुरक्षाकी मांग करता है, तब कई प्रकरणोंमें पुलिस सुरक्षा देनेकी मांगको नकारते हैं, (सुरक्षाकी आवश्यकता होनेपर धन देकर सुरक्षा प्रदान करनेका शासनका नियम है) तथा सुरक्षाकी आवश्यकता हो तो उसे क्रय करनेके विषयमें उस व्यक्तिको बताते हैं । वस्तुतः प्रत्येक व्यक्तिकी जीवनकी सुरक्षाका कर्तव्य राज्यकर्ताओंका है । व्यक्तिका जीवन असुरक्षित होनेपर, उसके असहाय होनेका लाभ लेकर उसे सुरक्षा क्रय करनेको कहनेवाले पुलिस तथा ऐसा नियम बनानेवाले कर्तव्यविमुख राजनेता इस निधर्मी लोकतन्त्रकी देन हैं । हिन्दू राष्ट्रमें प्रत्येक व्यक्तिके सुरक्षाका दायित्व राज्यकर्ताओंपर होगा; सामान्य व्यक्ति भयमें जीवन व्यतीत करे, ऐसी परिस्थिति हिन्दू राष्ट्रमें नहीं होगी, इससे जनता निर्भय होकर जीवनयापन कर सकेगी । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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