श्रीगुरु उवाच


‘समानशीले व्यसनेषु सख्यम् ।’ अर्थात समान स्वभावके अथवा संकटमें फंसे लोगोंकी मैत्री स्वतः ही हो जाती है, ऐसा सिद्धान्त है । इस सिद्धान्तके अनुसार, बुद्धिप्रामाण्यवादी एवं उनके समान अनिष्ट शक्तियोंसे आवेशित लोग श्मशानमें पार्टी (भोज) अथवा विवाह भी करते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution