श्रीगुरु उवाच


उत्पत्ति, स्थिति और लय, इन सिद्धांतोंके अनुसार विविध संप्रदायोंकी स्थापना होती है और कालांतरमें उनका लय होता है, अर्थात वे समाप्त हो जाते हैं । इसके विपरीत, सनातन हिन्दू धर्मकी उत्पत्ति न होने, अर्थात यह अनादि होनेके कारण अनंतकालतक रहेगा । यह हिन्दू धर्मकी विशेषता है । विश्‍वमें दूसरा धर्म ही न होनेके कारण, ‘सर्वधर्मसमभाव’ शब्दप्रयोग कितना अनुचित है, यह ध्यानमें आता है । –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution