श्रीगुरु उवाच


‘संघे शक्तिः कलौ युगे ।’ अर्थात ‘कलियुगमें संगठित रहनेमें ही शक्ति है ।’ इस सिद्धान्तके अनुसार, किसी विषयपर किसी संगठनका अकेले आंदोलन करनेकी तुलनामें अनेक संगठनोंका मिलकर जनजागृति हेतु वैध मार्गसे आंदोलन करना अधिक प्रभावशाली होता है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : https://sanatanprabhat.org/



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