आधुनिक विज्ञान एवं अध्यात्मशास्त्रमें भेद


* कहां बालवाडीकी (शिशुवर्गकी) भांति मायाके विषयोंकी जानकारी देनेवाला विज्ञान, तो कहां ईश्वरप्राप्ति करानेवाला सर्वोच्च स्तरका अध्यात्मशास्त्र !
* अध्यात्मशास्त्रमें १४ विद्याएं तथा ६४ कलाएं अर्थात विश्वके सभी विषय होते हैं ।
* विश्व : आधुनिक विज्ञान केवल दृश्य स्वरूपके ग्रह-तारोंके विषयमें थोडी-बहुत जानकारी दे सकता है । इसके विपरीत अध्यात्मशास्त्र सप्तलोक तथा सप्तपातालके सूक्ष्म जगतकी जानकारी देता है ।
* ज्योतिषशास्त्र : आधुनिक विज्ञान विभिन्न ग्रहोंसे केवल पृथ्वीकी दूरी तथा उसकी भौगोलिक स्थिति इतना ही बताता है । इसके विपरीत ज्योतिषशास्त्र ग्रहोंके मानवपर होनेवाले परिणाम, अनिष्ट परिणाम टालनेके उपाय इत्यादि सभी बताता हैं ।
* हस्तसामुद्रिक शास्त्र : ‘हाथोंकी रेखाओंसे भविष्य बताया जा सकता है’, ऐसा विचार भी विज्ञानवादियोंके मनमें कभी नहीं आता । इसके विपरीत भारतमें वह एक शास्त्रके रूपमें सहस्रों वर्षोंसे सिखाया जा रहा है ।
* वैद्यकीय क्षेत्र : आधुनिक विज्ञान केवल बुद्धिसे समझमें आनेवाले ऊपर-ऊपरके कारण तथा उपाय बताता है । इसके विपरीत अध्यात्मशास्त्र व्यक्तिको रोग होने हेतु कारणीभूत काल (ज्योतिषशास्त्र), प्रारब्ध, अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट इत्यादि अनेक सूत्र ध्यानमें दिलाकर कारण बताता है तथा उसपर उपाय भी बताता है ।
* आयुर्वेद : आयुर्वेद एक ‘उपवेद’ है । आयुर्वेदमें व्यक्तिके वात, पित्त, कफ प्रधान प्रकृतिके अनुसार औषधि दी जाती है । इसके विपरीत ‘एलोपैथी’में प्रकृति ज्ञात न होनेके कारण सभीको एक ही औषधि दी जाती है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात



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