कहां आधुनिक न्याय प्रणाली और कहां अध्यात्मशास्त्र !


अध्यात्ममें व्यक्तिकी आयु नहीं देखी जाती, उसकी वृत्ति एवं कृति देखी जाती है; इसीलिए अपनेसे छोटे आयुके सन्तोंके भी सब चरणस्पर्श करते हैं । इसके विपरीत आधुनिक विचारधारायुक्त न्यायप्रणाली केवल आयु देखती है; इसीलिए अपराध करनेकी बुद्धि रखनेवालोंको भी बालक ही समझती है !



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