बुद्धिवादियोंमें जिज्ञासा नहीं होती; इसलिए वे, ‘बुद्धिकी समझसे परेकी बातें, उदा. देवता और अनिष्ट शक्तियोंके विषयमें कहते हैं कि ये नहीं होतीं ।’ उनके ऐसा कहनेसे समाजके कुछ लोग ईश्वरसे दूर हो रहे हैं, इसका उन्हें पाप लग रहा है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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