श्रीगुरु उवाच


सहस्रों वर्ष पूर्व ऋषि-मुनियोंद्वारा बताए गए मूलभूत सिद्धान्तोंमें कोई कुछ भी परिवर्तन नहीं कर सकता; क्योंकि उन्होंने चिरन्तन सत्य बताया है; इसलिए उसमें ‘संशोधन’ नहीं करना पडता । इसके विपरीत बुद्धिवादियोंके विज्ञानमें निरन्तर ‘संशोधन’ होते रहते हैं; क्योंकि उनके सिद्धान्त कुछ वर्षके उपरान्त परिवर्तित हो जाते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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